बीमारियां और बाॅडी सिगनल

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कोई भी बीमारी आने से पहले कुछ सिगनल जरूर देती है। इन्हें पहचान कर किसी बड़े खतरे को टाला जा सकता है।

अनीमिया

भारतीय महिलाएं खून की कमी की ज्यादा शिकार होती हैं। गलत खान-पान और पर्याप्त पोषण ना मिल पाने के अलावा अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतने की उनकी आदत भी इसकी जिम्मेदार है। इसके लक्षणों पर ध्यान दें-
1. लगातार थकान बने रहना।
2. चेहरा पीला पड़ना और आंखों का रंग सफेद होना।
3. दिल की धड़कन बढ़ना। शरीर में खून की कमी के कारण हृदय पर ज्यादा जोर पड़ता है, जिस कारण हार्ट बीट बेहद तेज होने लगती है। कई बार मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत भी आ जाती है।
4. चलते समय सांस फूलना और घबराहट होना।
5. किसी काम में मन ना लगना।
6. अगर हीमो- ग्लोबिन के साथ आयरन भी कम होने लग जाएं, तो पूरी बाॅडी और जीभ सफेद होने लगती है।
7. अनीमिया अगर सालों तक रहे, तो होंठ किनारे से फटना शुरू हो जाते हैं। ऐसा व्यक्ति जरा-सी भी मिर्च और नमक नहीं खा पाता है।
8. दिमाग तक में रक्त संचार में कमी आने लगती है और व्यक्ति अचानक से बेहोश हो सकता है।

 

 

आर्थराइटिस

यह समस्या सिर्फ जोड़ों के दर्द से ही शुरू नहीं होती। आजकल ना सिर्फ बड़ी उम्र के लोग, बल्कि युवाओं में भी इस बीमारी की शुरूआत देखी जा रही है। ऐसा ज्यादातर कोई फिजिकल एक्टिविटी ना होने के कारण होता है। पुरूषों के मुकाबले महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। अन्य लक्षणों पर भी गौर करें-
1. हाथ-पैर और खासकर घुटने मोड़ने में तकलीफ होना, इस बीमारी में शरीर के ज्वाॅइंट्स आपस में जुड़ने लगते हैं।
2. चलने-फिरने में तकलीफ होना।
3. जोड़ों में भारीपन व दर्द।
4. उंगलियों में जलन रहना।
5. सुबह उठने पर जोड़ों में दर्द व अकड़न होना। कुछ देर चलने-फिरने से यह दर्द कम होने लगता है।

 

 

सर्वाइकल

गर्दन या पीठ में दर्द होने के अलावा भी कुछ बातें हैं, जिनसे पता चलता है कि आपको स्पाॅन्डिलाइटिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। लंबे समय तक कम्प्यूटर या लैपटाॅप पर काम करते रहना, स्मार्टफोन की लत और कंधों की मांसपेशियों में जकड़न की वजह बन सकते हैं। चूंकि बच्चे आजकल ई-बुक्स और डिजिटल प्रेजेंटेशन पर ज्यादा निर्भर रहते हैं, इसलिए उनमें भी यह समस्या देखी जाने लगी है। इन लक्षणों पर गौर करें-
1. लगातार बहुत तेज सिर दर्द होना।
2. अचानक बेहोशी छाना।
3. हाथों का सुन्न होना व उनमें झनझनाहट होना।
4. पिंडलियों में क्रैंप्स और ऐंठन होना।
इसे अक्सर हम सिर्फ विटामिन ई की कमी से ही जोड़ कर देखते हैं।
5. पीठ, पैरों और कूल्हों में रहने वाला नसों का दर्द और शियाटिका का दर्द लंबर स्पाॅन्डिलाइटिस की निशानी है।

 

 

डिपे्रशन

डिप्रेशन युवाओं में तेजी से फैल रहा है। लक्षणों पर गौर करें-
1. हर समय थकान रहना।
2. किसी काम में मन न लगना।
3. नींद या तो बहुत ज्यादा आना या फिर बिल्कुल ना आना।
4. बार-बार पेट खराब होना।
5. वजन में बदलाव होना।
6. चिड़चिड़ापन रहना।

 

 

डाइबिटीज

डाइबिटीज अब बीमारी नहीं, बल्कि गलत लाइफस्टाइल से जुड़ी एक स्थिति है। गला सूखना, जल्दी यूरिन पास होना जैसे आम लक्षणों के अलावा कुछ और बातें भी इसकी ओर इशारा करती हैं-
1. हर समय थकान महसूस होना।
2. बहुत भूख लगना, पर फिर भी वजन ना बढ़ना।
3. हाथ-पैरों का बार-बार सुन्न होना, या फिर पैरों में लगातार बने रहने वाला दर्द और ऐंठन।
4. लंबे समय तक इन लक्षणों को नजर अंदाज किया जाए, तो आंखें चुंधियाने या कुछ आकृतियां नजर आने लगती हैं।

 

 

हार्ट अटैक

हार्ट अटैक से पहले शरीर में येे लक्षण दिखाई देते हैं-
1. नाभि से ऊपर कहीं भी दर्द या बेचैनी। यह जबड़े, पीठ या कंधे में भी हो सकती है।
2. सांस फूलना, दम घुटना।
3. जरा-सा भी भारी खाना खाने के बाद गैस या बहुत ज्यादा बेचैनी होना।
4. सोते समय पसीना आना और सीने में दर्द होना।
5. बिना वजह की थकान, जो आराम
से भी दूर ना हो।

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