Dublapan Logon Ke Liye Ban Raha Ek Abhishap

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Dublapan Logon Ke Liye Ban Raha Ek Abhishap

दुबलापन लोगों के लिए बन रहा एक अभिशाप!

यह सच है कि मोटापा एक अभिशाप है, लेकिन दुबलापन(कृशता) भी अभिशाप से कम नहीं है। इस संबंध में इन बिन्दुओं पर विचार करें।

1. दुबला व्यक्ति हृष्ट-पुष्ट शरीर वालों के बीच आनंद का अनुभव प्राप्त नहीं कर सकता है। ऊपर से चाहे कितना ही मुस्करा दे, हंसने का नाटक करे, लेकिन अंदर से हीनभावना का स्रोत प्रस्फुटित होता है- काश! मैं भी इन जैसा होता है।

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2. यदि पत्नी(अर्धांगिनी) हृष्ट-पुष्ट हो तो पति का पत्नी के साथ कहीं आना-जाना भी कठिन होता है। स्वयं तो हीनभावना से ग्रस्त होते ही हैं, पत्नी भी अपने आपको कोसती है।

Dublapan Logon Ke Liye Ban Raha Ek Abhishap

3. यदि अंदर से ऐसा व्यक्ति स्वस्थ भी होता है, तो भी अनायास लोग पूछ बैठते हैं ‘क्या बीमार है?’ अर्थात् रोगी समझ लेते हैं।

Dublapan Logon Ke Liye Ban Raha Ek Abhishap

4. दुर्बल व्यक्ति की भोजन की मात्रा एक सुडौल व्यक्ति की तुलना में अधिक होती है। वह पार्टियों दावतों में अधिक भोजन करके प्रमाणित भी करना चाहता है कि मैं अपेक्षाकृत अन्य से अधिक पचाने वाला हूं, जबकि वास्तविकता कुछ और होती है। ऐसे व्यक्ति के शरीर में तो आहार या पेय का मात्र ग्रहण और निष्कासन ही होता हैै। यदि पाचन क्रिया ठीक से होती, पाचन संस्थान उचित रूप से सक्रिय होता तो पोषक तत्व को शरीर की 1-1 कोशिका तक ठीक से अवश्य पहुंचा देता है। यदि ऐसा होता है तो शारीरिक कृशता नहीं होती।

5. ऐसे व्यक्ति यदा-कदा अपने स्वास्थ्य के बारे में चिंतित भी रहते हैं। इन विचारों से मानसिक तनाव बढ़ता है और कई रोग हो जाते हैं।

6. दुर्बल व्यक्ति कभी भी कांतिवान ओजवान और वीर्यवान नहीं हो सकता है। परिणामतः दाम्पत्य जीवन भी सुखी नहीं रहता है।

7. यदि कोई लड़की या स्त्री दुर्बलता का शिकार हो जाये, तो उसमें श्वेत प्रदर, रजोदोष, हाथ-पावों में जलन, चक्कर आना, कमर दर्द आदि कष्ट होते हैं। रजोदोष के कारण बांझपन(बन्ध्यापन) हो जाता है।

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8. कुछ लोग शरीर को सुडौल बनाने की दृष्टि से अपनी खुराक कम कर देते हैं। परिणामतः शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलते हैं, जिससे अंग विशेष कमजोर होने लगते है और अनेक रोग हो जाते हैं। अतः समुचित आहार अवश्य लें। पुरूषों की अपेक्षा स्त्रियों और लड़कियों में आहार कम करके शरीर सुडौल बनाने की इच्छा अधिक होती है।

9. लड़कियों और स्त्रियां स्लिम फिगर बनना चाहती हैं, क्योंकि उनकी खूबसूरती और सफलता इसी पर निर्भर करती है। परिणामतः खानपान अव्यवस्थित हो जाता है, जिस कारण अनेक रोगों के शिकार होने के साथ-साथ आत्महत्या तक की प्रवृति जग जाती है। भला ऐसी चाह किस काम की?

10. परिश्रम करना अनुचित नहीं है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य एवं शरीर के लिए आवश्यक भी है, लेकिन अति श्रम भी शरीर के लिए हितकर नहीं है। पौष्टिक आहार के अभाव में कठिन परिश्रम शरीर को दुर्बल बना देता है।

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