Mota Hone Ke Gharelu Nuskhe

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Mota Hone Ke Gharelu Nuskhe

मोटा होने के घरेलू नुस्खे

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जैसे अत्यधिक मोटापा व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य और व्यक्तिगत पर्सनेलिटी के रूप से सही नहीं है, ठीक उसी प्रकार बहुत अधिक दुबलापन भी व्यक्ति को स्वास्थ्य नुकसान पहुंचाता ही है, साथ ही वह लोगों के बीच हंसी का पात्र भी बनता रहता है। कितने ही अच्छे व महंगे वस्त्र पहन लें, मगर उसके तन पर वह जंचते ही नहीं है, बल्कि वह और भी अधिक बेढंगा नज़र आने लगता है।
जहां एक ओर लोग मोटापा से छुटकारा पाने की जुगत में लगे हुए हैं, तो वहीं कुछ अपने दुबले-पतले शरीर के कारण परेशान हैं और दुबलेपन से मुक्ति पाने के प्रयास में लगे रहते हैं। इस हिंदी लेख में वज़न बढ़ाने और सेहत बनाने से संबंधित कुछ सेवन रूपी योग बताये जा रहे हैं, जोकि निम्नलिखत हैं..

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वजन बढ़ाने व सेहत बनाने के कुछ अनुपम योग

Mota Hone Ke Gharelu Nuskhe

1. माँसवर्धक जौ की खीर

Mota Hone Ke Gharelu Nuskhe

आवश्यकतानुसार जौ लेकर पानी में भिगोकर कूटका छिलका उतार लें। चावल के स्थान पर प्रति 60 ग्राम जौ के लिए 500 मि.ली. दूध के अनुसार से योग देकर खीर बनायें। इस खीर का नाश्ता नित्य दो मास तक करें। इसके दो मास के सेवन से व्यक्ति मोटा ताजा व हट्ट-कट्टा हो जाता है। बाद में भी सप्ताह में 2-3 बार इसका नाश्ता करने का क्रम जारी रखें।

2. जौ का पानी

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जौ का उबाला हुआ पानी 60 मि.ली. नित्य पीने से रक्त की वृद्धि होती है। इसका सेवन गर्मियों में अधिक अनुकूल है।

3. छुहारों की खीर

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दूध 500 मि.ली. में दो छुहारे डालकर उबालें। आधा शेष रहने पर मिश्री 2 चम्मच या खाँड मिला लें। सोते समय छुहारे खाकर दूध पी लें। छुहारे जिसे अनुकूल नहीं हो अर्थात् गर्मी क करे, वे मात्र दूध ही पी लें। आयुर्वेद अनुसार छुहारे खाने में स्निग्ध, मधुर, गुरू, विषाक में मधुर एवं शीत वीर्यवाला अनेक गुणों से ओत-प्रोत होने के कारण अकेला ही अनेक रोगों को सदा के लिए दूर करने में समर्थ है। यह पित्तशामक, कफ़ निस्सारक, स्तम्भक, नाड़ी बलदायक, ज्वर दाह, मस्तिष्क दुर्बलता, तृष्णा, वमन, अतिसार, मूत्र कृच्छ एवं कटिशूल आदि वात विकारों को दूर करने में सक्षम है।
इसका प्रयोग शीतकाल में 2-3 सप्ताह तक करें। इसका सेवन रात को सोते समय करें, क्योंकि इसके सेवन के दो घंटे बाद तक पानी नहीं पीना है। इससे अधिक मत लें। अधिक लेने से गर्मी करते हैं।

4. छुहारों का दूध

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2 छुहारों को रात को मिट्टी या काँच के बर्तन में भिगा दें। प्रातः गुठलियाँ निकाल कर छुहारों को दूध 300 मि.ली. में उबालें। 250 मि.ली. शेष रहने पर दूध पी लें। इसके प्रयोग से कुछ ही दिनों में कमज़ोरी दूर होकर स्वास्थ्य को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। इसके नियमित सेवन से कुछ ही दिनों में भूख लगने लगती है और भोजन शीघ्र पच जाता है। चाहे कितना ही दुर्बल रोगी क्यों न हो, इसके सेवन से अपार बल प्राप्त होता है। इसकी एक और विशेषता यह है कि बच्चे यदि शैय्या मूत्र के शिकार हों, यानी बिस्तर पर मूत्र त्याग करने की आदत हो, तो इस योग से लाभ होता है।

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बच्चों के लिए छुहारा की संख्या मात्रा 1 और दूध 250 मि.ली. लें। यह छुहारे का दूध गुनगुना ही बच्चे को नित्य रात को सोते समय दें। इसके प्रयोग से बच्चों के मूत्राशय में मूत्र रोकने की क्षमता और मस्तिष्क में स्मरण धारण की क्षमता बढ़ जाती है। यद्यपि लाभ 1-2 सप्ताह में ही होने लगता है, लेकिन पूर्ण लाभ के लिए 2-3 सप्ताह तक नियमित रूप से देते रहें।

5. खजूर का दूध

5-7 खजूर की गुठलियाँ निकाल कर पानी से धोकर दूध 300 मि.ली. में धीमी आँच पर पकायें। 15-20 मिनट बाद खजूर गल जाने पर खजूरों को दूध से निकाल कर चबा-चबा कर खायें और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें। यह सस्ता सर्वगुणयुक्त महाशक्तिवर्धक योग है।
नोट- खजूर की खीर खाने से वज़न बढ़ता और कब्ज़, क्षय तथा पेट के अन्य रोग भी दूर हो जाते हैं। खूजर आमाशय और हृदय को बल देती है तथा नया रक्त उत्पन्न करके शरीर एवं चेहरे को लाल आभायुक्त बना देती है। सूखी खाँसी एवं दमा में भी लाभदायक है। छाती के रोगों को भी लाभ पहुंचाती है। क्षय रोग, अतिसार, संग्रहणी और बहूमूत्र में भी लाभदायक है। इसका सेवन नित्य रात को सोने से पहले 4 सप्ताह से 4 मास या इससे भी अधिक कर सकते हैं। 4 सप्ताह से कम समय में सेवन करने पर पूर्ण लाभ की आशा न करें।

6. खजूर और घी-

खजूर की गुठली निकाल कर छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। यदि खजूर 1 लें तो देसी घी 1 चम्मच तथा काली मिर्च 20 नग लें। अच्छी प्रकार मिलाकर खायें। आयु के अनुसार खजूर 1 से 3 नग तक ली जा सकती है। इसका सेवन नियमित रूप से 3-4 सप्ताह तक करें। इससे अद्भुत शक्ति एवं स्फुर्ति प्राप्त होती है।

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