Sehat Banane Ke Liye Kya Desi Upchar Kare

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सेहत बनाने के लिए क्या देसी उपचार करें

दुबलापन क्या है?

शरीर की लम्बाई के अनुपात में शारीरिक वज़न का कम होना दुबलापन का स्पष्ट प्रमाण है। शारीरिक दुबलापन कितना है इसे निम्न सारिणी(Table) से ज्ञात कर सकते हैं।

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उपरोक्त वज़न, लम्बाई के अनुसार दिया गया है। नाॅर्मल शारीरिक वज़न पुरूषों के वज़न में 10 प्रतिशत और स्त्रियों के वज़न में 15 प्रतिशत और कम होना चाहिए।
उपरोक्त सामान्य वज़न में लम्बाई के अनुसार शारीरिक वज़न जितना अधिक कम होगा, वह व्यक्ति उतना ही अधिक दुर्बल माना जायेगा। इससे स्पष्ट है कि इस चार्ट से दुर्बलता का माप सूक्ष्मता से मापा जा सकता है। अन्यथा एक दुर्बल व्यक्ति के पिचके गाल, उभरे हुए गालों की हड्डियां, पसलियों का स्पष्ट गिना जाना, पिण्डलियों का पतलापन, जांघों की झूलती(लटकती) त्वचा, अंदर की ओर धंसी हुई आंखें देखकर ही पहचान की जा सकती है।
इस चार्ट सारिणी से चिकित्सक को यह निर्णय लेने में भी सहायता मिलती है कि मैं जिस रोगी की चिकित्सा करने जा रहा हूं, उसमें कितने वज़न की कमी है। हमें इसे पूरा करने के लिए रोगी को कितनी अवधि के लिए आश्वस्त करना चाहिए। इतना ही नहीं, वज़न की जितनी अधिक कमी होगी, उसी अनुपात में औषधि एवं खानपान के प्रति भी निर्देश देने में भी सहायता मिलेगी।

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दुर्बलता का मुख्य कारण-

हालांकि दुर्बल होने के कई कारण हैं, जिनमें मुख्य कारण निम्न हैं-
आहार(भोजन) एवं पेय में पोषक तत्वों का विशेष अभाव, भोजन(आहार) की कमी, निश्चित समय पर भोजन न करना, मल-मूत्रादि के वेगों को रोकना, मानसिक तनाव, अरूचिकर भोजन खाना, किसी कारण से भयभीत रहना, असंयमित संभोग(वीर्य का क्षरण), अधिक चिंता, पाचन संस्थान की गड़बड़ी(उदर विकार, अतिसार आदि) होना, किसी भी कारण से बार-बार उल्टियां आना, आँत्रकृत्रि(पेट व आंत में कीडे़), लगातार अस्वस्थ रहना, जीर्ण रोग का(यक्ष्मा आदि का) शिकार होना आदि।
यदि कोई व्यक्ति भली-भांति स्वस्थ होने पर भी दुबला हो और शारीरिक विकास नहीं हो रहा है, तो संभव है कि उसकी थायराइड ग्रंथि की कार्यक्षमता संतोषजनक नहीं है।

वज़न बढ़ाने और सेहत बनाने के लिए लाभदायक देसी उपाय-

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1. शरीर का वज़न और सुंदरता बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक पानी नहीं पीकर, 5 से 10 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए, लेकिन जो मोटा बनना चाहते हैं, उन्हें कम से कम 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। उन्हें और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए पानी के स्थान पर अधिक से अधिक जौ का पानी स्ट्राॅ(कोल्ड ड्रिंक पीने वाली नली) से पीना चाहिए। इस उपाय से पिचके हुए गाल भी फूल जाते हैं।

2. बिनौले(कपास के बीज) 1.5 किलो खूब बारीक पीस लें। इसे पहले पानी में भिगो दें। 4-5 घंटे तक भीगने दें। यह अच्छी प्रकार मुलायम हो जायेंगे। फिर छलनी से छानकर खूब बारीक पीसकर इसका दूध निकाल लें। दूध छानने में अधिक पानी का प्रयोग न करें। इससे छानने के लिए मोटे धागे वाले सूती कपड़े का प्रयोग करें तो अधिक अच्छा होगा। जैसे खादी का कपड़ा आदि।
अब इस दूध में काली मूसली, सफेद मूसली, सिंघाड़े का आटा, असगन्ध नागौरी प्रत्येक 50 ग्राम मिलाकर इतना पकायें कि तमाम दूध अवशोषित हो जाये। फिर छाया में सुखाकर शुष्क कर लें। शुष्क होने के बाद कूटने योग्य होने पर कूटकर चूर्ण बना लें। प्रतिदिन सुबह 15 ग्राम खाकर गुनगुना मीठा दूध 250 मि.ली. पी लिया करें। इससे शरीर खूब मोटा हो जायेगा तथा चेहरे का रंग भी निखर आयेगा। दुबला शरीर मोटा होनके साथ-साथ शक्ति और सामथ्र्य का भंडार हो जायेगा। हृष्ट-पुष्ट होने के बाद मात्रा धीरे-धीरे कम कर दें। अन्यथा मोटापा का शिकार हो जायेंगे तथा शरीर भद्दा हो जायेगा।

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3. योग- बिनौले की गिरी, खुश्क धनिया, सफेद खशखाश प्रत्येक 3 ग्राम। सबको अर्क गुलाब 60 मि.ली. में घोंट कर खांड 10 ग्राम मिलाकर सुबह-शाम 15-20 दिन तक दें।
उपरोक्त योग सिर चकराने, स्नायुविकि एवं मानसिक कमजोरी, सिरदर्द, शरीर की कमजोरी और दुबलेपन में लाभप्रद है। यह वज़न बढ़ाने के साथ-साथ शक्ति प्रदान भी करता है।

इसे पढ़ने के लिए क्लिक करें- हाई ब्लडप्रेशर

4. यदि बच्चा सूखा रोग के कारण दुबला-पतला हो तो निम्न योग दें। इसके सेवन से बच्चों की दुर्बलता दूर होगी और साथ ही दस्त आना, शारीरिक कमजोरी, ज्वर आदि भी दूर हो जाते हैं।
योग- जहरमोहरा, तबाशीर, जीरा गुलाब, कमलगट्टा की गिरी समभाग चूर्ण बना लें। 3-3 ग्राम अनार के शर्बत में मिलाकर नित्य 2-3 मात्रायें दें। वयस्कों को 5 से 8 ग्राम तक दें।

5. स्त्रियों के लिए कल्प योग- श्वेत प्रदर के कारण या अन्य कारणों से यदि कोई स्त्री बहुत कमज़ोर हो गई हो, मरियल दुबली-पतली अस्थिपंजर लग रही हो तो निम्न योग दें। इससे श्वेत प्रदर दूर होगा और शरीर हृष्ट-पुष्ट होगा। चेहरे का पीलापन दूर होकर चेहरा लाल अभायुक्त हो जायेगा।
योग- सालब मिश्री पंजादार 15 ग्राम, सुपारी चिकनी 15 ग्राम, दाना छोटी इलायची 9 ग्राम, तबाशीर 9 ग्राम, मोचरस 9 ग्राम, ढाक का गोंद 9 ग्राम, मस्तगी रूमी 6 ग्राम। सबको कूट-पीस लें। चांदी के वर्क 6 ग्राम, कुहर्वाशमई, सदफमर्वारीदी, शाख मरज़ान, बसद अहमर, प्रत्येक 450 ग्राम अर्क गुलाब एवं रूह केवड़ा डालकर इतना खरल करें कि अर्क 30 मि.ली. शोषित हो जाये। औषधि सुरमें की भांति बारीक हो जाये। अब केवल 10 ग्राम पहली औषधि में मिला लें। इस मिश्रित योग में बरगद का दूध 25 ग्राम मिलाकर खरल करें, फिर तमाम औषधि के बराबर मिश्री मिलाकर खरल करें। औषधि तैयार है। कुल औषधि की 24 मात्रायें बनायें। नित्य सुबह एक मात्रा दूध के साथ दें।
नोट- इस औषधि के सेवन काल में लालमिर्च, गुड़, तेल, खटाई और संभोग से दूर रहें।

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