Dont Call Me पतला पापड़

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बचपन से ही रोहित आर्मी में भर्ती होने के सपने देखता था। बस उसकी परेशानी थी दुबला शरीर। काॅलेज में कोई उसे पतला पापड़ बुलाता था, तो कोई लटके राम। आर्मी में भर्ती होने की धुन में, फिट होने का जुनून रोहित के सिर पर सवार हो गया। वह ताबड़तोड़ प्रोटीन सप्लिमेंट और वज़न बढ़ाने की दवाएं लेने लगा। साथ ही कई घंटे जिम में बिताने शुरू कर दिये। नतीजा, रोहित फिट तो नही हुआ, हाॅस्पिटल जरूर पंहुच गया। डाॅक्टर ने उसे फौरन प्रोटीन और दूसरे सप्लिमेंट्स के साथ जिम भी बंद करने को कहा। किडनी व हार्ट की जांच कराने से पता चला कि किडनी मात्र 40 फीसदी ही काम कर रही है। सही इलाज के बाद अब रोहित नाॅर्मल होता जा रहा है। दरअसल, ये किस्सा आम बात है। कई बार अंडरवेट से फिट होने का दीवानापन हालत और खराब कर सकता है, अनाप-शनाप कदम उठाने के बजाय, वेट गेन करने के लिये सही तरीका चुने। ऐसे मंे अंडरवेट होने की परेशानी से गुजर रहे लोगो के दिमाग में उठने वाले काॅमन सवाल और जवाब हम देरहे हैं:

दुबलेपन का जवाब:
बीएमआई पर अंडरवेट कितना अंडरवेट?

इस सवाल का जवाब खुद ढूंढने के लिए बीएमआई एक बेहतर विकल्प हो सकता है। बीएमआई(बाॅडी मिक्स इंडेक्स), हाइट-वेट रेशो है। इसे फिटनेस के एक पैमाने के तौर पर देखा जाता है। हालांकि यह फिट होने का अकेला पैमाना नहीं है। हो सकता है कोई इंसान बीएमआई के पैमाने पर तो फिट हो, लेकिन फिर भी फिट न हो। किसी का वजन इस वजह से भी कम हो सकता है कि उसकी बोन डेंसिटी कम है। ऐसे में बीएमआई ही केवल अंडरवेट होने का पैमाना नहीं हो सकता।

डाॅक्टर किसे मानते हैं अंडरवेट?
डाॅक्टर के अनुसार किसी के अंडरवेट होने का निर्णय अक्सर दो बातों को देखकर लिया जाता है। पहला कि इंसान एक्टिव है या नहीं। अगर वह एक्टिव है और अपने सभी काम सही ढंग से कर रहा है, तो भले ही उसका वेट बीएमआई अनुसार नाॅर्मल से कम ही क्यों न हो, परेशानी की कोई बात नहीं है। ऐसे में उसे अंडरवेट इन हेल्दी कंडीशन कह सकते हैं। इसका दूसरा पैमाना है, कहीं उसे कोई बीमारी तो नहीं है। किसी के अंडरवेट होने में कुछ बीमारियां भी कारण बन सकती हैं। मसलन, एनीमिया(खून की कमी, जो विटामिन्स, आयरन की कमी या पेट में कीड़े की वजह से भी हो सकती है), टीबी, हाॅर्मोनल डिसआॅर्डर की जांच करते हैं। अगर ऐसा है, तो पहले इनका इलाज जरूरी है।

क्यों होता है कोई अंडरवेट?
अमूमन इन वजहों से इंसान दुबला-पतला हो सकता है।
1. न्यूट्रिशन कम लेना या बैलेंस्ड डाइट न लेना।
2. बढ़ती उम्र में खान-पान पर ध्यान न दिया जाना।
3. फिजिकल वर्क के हिसाब से डाइट या कैलरी न लेना।
4. किसी ऐसी खास जेनेटिकल प्राॅब्लम की वजह से।
5. किसी खास तरह की बीमारी से ग्रसित या हाॅरमोनल डिस आॅर्डर होना।
6. ज्यादातर मामलों में खून की कमी, पेट में कीड़े होने से।

वजन को लेकर कब करें चिंता?
डाॅक्टर्स का कहना है कि कोई लड़का, जिसकी उम्र 18 साल से ज्यादा है, तो उसका वजन 50 किलो से ज्यादा होना चाहिए। वहीं लड़कियों के लिए यह सीमा 45 किलो है। अगर वजन इससे कम है, तो यह चिंता की बात हो सकती है। ऐसे में सबसे पहले डाॅक्टर के पास जाना चाहिए, ताकि डाॅक्टर जांच कर सके कि वजन कम होने कारण क्या है?

हर दुबले को परेशानी हो सकती है?
जरूरी नहीं कि जो अंडरवेट हैं, वह हेल्दी न हों। अगर कमजोरी महसूस नहीं होती, वजन लगातार कम नहीं हो रहा, तेजी से चलने पर सांस नहीं फूलती, आपका बीपी, पल्स रेट सब नाॅर्मल है, तो चिंता की कोई बात नहीं है, लेकिन अगर आप अंडरवेट हैं और ये परेशानियां भी आपके साथ हैं, तो डाॅक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

वजन बढ़ाने में जिम कितना मददगार?
अगर बाॅडी बनाना है, तो जिम जा सकते हैं। वैसे ऐसा भी नहीं है कि जिम जाए बिना हेल्दी और फिट नहीं रहा जा सकता। रोज घर पर वर्कआउट या योगाभ्यास करके भी हेल्दी हो सकते हैं। घर के आसपास के पार्क में भी जाकर एक्सरसाइज कर सकते हैं। जिम जाने से एक फायदा जरूर होता है। आपका रूटीन फिक्स हो जाता है। साथ ही एक्सरसाइज का सही तरीका जानने के लिए जिम इंस्ट्रक्टर की मदद भी मिल जाती है।

प्रोटीन सप्लिमेंट्स हैं जरूरी?
आज हर युवा चाहे वो शहर में रह रहा हो या किसी छोटे गांव में, मजबूत बाॅडी बनाने की चाहत रखता है। बस दिक्कत है, शार्टकट या कम वक्त में ही हैंडसम और स्मार्ट दिखने की चाहत में किसी भी हद तक जाना। ऐसे में जिम ज्वाइन करने के साथ ही प्रोटीन सप्लिमेंट्स और स्ट्राॅयड लेना शुरू कर देते हैं। हालांकि यह शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे आॅस्टियो- पोरोसिस, यानी हड्डी कमजोर होने की समस्या हो सकती है। ऐसे किसी भी कदम से पहले आप डाइटिशन या डाॅक्टर की सलाह जरूर लें। अगर सप्लिमेंट्स लेना हो, तो डाॅक्टर या डाइटिशन की सलाह लें या चेतन हर्बल्स का सेहतप्राश कैप्सूल लें, ये पूर्णतया आयुर्वेदिक व हानिरहित है।

विज्ञापनों पर कितना करें यकीन?
विज्ञापनों में तमाम ऐसे प्राॅडक्ट रोज दिखाई देते हैं, जो चंद दिनों में ही वजन बढ़ाने का दावा करते हैं। कभी भी सिर्फ विज्ञापन देखकर प्राॅडक्ट न खरीदें। विज्ञापनों में दिखाये नुस्खों के दम पर ही अगर कोई फिट हो सकता, तो जिम और डाइटिशन की जरूरत ही न होती। हमारी सलाह है कि आप विज्ञापनों से ज्यादा भ्रमित न हों।
आप अपनी बुद्धि व विवेक का इस्तेमाल करें और ‘चेतन हर्बल्स’ का हजारों मरीजों पर आजमाया हुआ पूर्णतया शुद्ध देसी आयुर्वेदिक व हानिरहित ‘सेहतप्राश कैप्सूल’ का पूरा कोर्स करें व मतबूत, गठीला शरीर पाएं। सेहतप्राश के नियमित सेवन से 10-15 दिनों में ही आपका वजन आपकी, हाइट के हिसाब से बढ़ने लगता है, चेहरे पर लालिमा आती है और कुछ ही दिनों में आपकी खूबसूरत पर्सनैलिटी बन जाती है।

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